Thursday, May 13, 2021
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Can People With Blood Cancer Receive Fully Protection Against Covid-19 After MRNA Vaccines? Studies


खास कोविड-19 वैक्सीन का असर और सुरक्षा को लेकर अटकलों का बाजार गर्म रहा है, खासकर चिह्नित स्वास्थ्य स्थिति से जूझ रहे लोगों के लिए. कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि खास प्रकार की एलर्जी वाले लोगों को वैक्सीन लगवाने से परहेज करना चाहिए, दूसरा इस तरह के कैंसर रोगियों को ज्यादा जोखिम में शामिल करता है. इस बीच, दुनिया कोविड-19 के मामलों में अप्रत्याशित उछाल देख रही है, ऐसे में जानना जरूरी हो जाता है कि इलाज करा रहे कैंसर रोगियों के लिए कोविड-19 की वैक्सीन कितनी प्रभावी हैं.

दो डोज वाली एमआरएनए वैक्सीन कम प्रभावी 

खोज की दिशा में कदम बढ़ाते हुए शोधकर्ताओं ने पाया है कि खास वैक्सीन कैंसर का इलाज करा रहे लोगों में कम प्रभावी हो सकती हैं. पत्रिका ब्लड में प्रकाशित दो रिसर्च के मुताबिक, एमआरएनए आधारित कोविड वैक्सीन का दोनों डोज ब्लड कैंसर का इलाज करा रहे लोगों में कम प्रभावी हो सकता है. नतीजों के आधार पर उन्होंने बताया कि एमआरएनए कोविड-19 वैक्सीन क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया और मल्टीपल माइलोमा वाले मरीजों में स्वस्थ लोगों के मुकाबले असर नहीं दिखा सकती.

क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया सबसे आम प्रकार का ल्यूकेमिया है जो व्यस्कों को प्रभावित करता है. ये बोन मैरो और ब्लड के कैंसर का प्रकार है. दूसरी तरफ मल्टीपल माइलोमा प्लाज्मा कोशिकाओं का कैंसर है जो सफेद कोशिका का एक प्रकार है जो एंटी बॉडीज पैदा करता है. हालांकि, शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण इन मरीजों के बीच अभी भी महत्वपूर्ण है.

कैंसर के मरीजों ने कम रिस्पॉन्स दर दिखाया

इजराइल में तेल अवीव के एक शोधकर्ता कहते हैं, “भले ही रिस्पॉन्स अत्यधिक न हो, मगर क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया वाले मरीजों को अभी भी वैक्सीन लगवाना चाहिए, अगर संभव हो तो बेहतर होगा कि उसका इलाज शुरू करने से पहले किया जाए, हालांकि बीमारी खुद ब खुद रिस्पॉन्स को प्रभावित कर सकती है.” शोधकर्ताओं ने क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया वाले 167 मरीजों और 53 स्वस्थ मरीजों को जांचा.

दोनों ग्रुप को फाइजर की कोविड-19 वैक्सीन का दोनों डोज दिया गया. विश्लेषण के बाद उन्होंने पाया कि जो लोग कैंसर का इलाज करवा रहे थे, उन्होंने वैक्सीन से इम्यून रिस्पॉन्स 16 फीसद पाया. क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया वाले मरीजों के नतीजे का आधार उनके कैंसर के इलाज की प्रक्रिया पर निर्भर रहा. क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया वाले जिन लोगों की मॉनिटरिंग की जा रही थी लेकिन इलाज नहीं मिल रहा थे, उन्होंने 55.5 फीसद रिस्पॉन्स की दर दिखाया.

इसके विपरीत जिन लोगों ने टीकाकरण से एक साल पहले अपना इलाज पूरा कर लिया, उनके अंदर इम्यून रिस्पॉन्स दर का 94 फीसद पता चला. शोधकर्ताओं ने बताया कि वैक्सीन से रिस्पॉन्स दर स्पष्ट रूप से आम आबादी के मुकाबले कम दिखाई दिया, जो कैंसर की सबसे अधिक संभावना के लिए जिम्मेदार ठहराया और निश्चित रूप से क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया. उन्होंने ये भी कहा कि क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमि वाले मरीजों का एंटी बॉडी भी कम था, जिसका मतलब है कि रिस्पॉन्स की तीव्रता कम थी.

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