Thursday, May 13, 2021
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महामारी ने कमजोर किया केरल का गल्फ कनेक्शन: कोरोना के बाद 12.32 लाख लोग खाड़ी देशों से लौटे, इनमें से 90% बेरोजगार; घर-गाड़ी का लोन तक चुकाना मुश्किल


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  • After Corona, 12.32 Lakh People Returned To Kerala From Gulf Countries, 90% Of Them Unemployed; Difficult To Pay Even A Home Loan

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कोच्चि8 मिनट पहलेलेखक: गौरव पांडेय

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  • केरल के 40 लाख लोग विदेश में रहते हैं, वे हर साल 80 हजार करोड़ रुपए भेजते हैं, पर पिछले साल 20 हजार करोड़ रुपए कम आए
  • बहरीन से वापस लौट राजेश आनंद बताते हैं कि 70% केरल के लोग गल्फ में 40 हजार रुपए महीने से भी कम में काम करते हैं

केरल में त्रिशूर के रहने वाले माहिम अहमद एक साल पहले तक कतर में टैक्सी चलाते थे। कोरोना आया और कतर में भी लॉकडाउन लग गया। माहिम बताते हैं कि ‘लॉकडाउन के साथ ही हमारा भी काम भी बंद हो गया। तीन महीने पगार नहीं मिली। मैं जिस कमरे में रहता था, उसमें हमारे साथ एक UP का बंदा, दूसरा पाकिस्तान और तीसरा बांग्लादेश का आदमी रहता था। एक कमरे में चार लोगों के साथ तीन महीने गुजारना किसी जेल की सजा जैसा ही रहा है। किसी तरह एक टाइम का खाना मिल पाता था। आखिरकार वंदे भारत के तहत मैं केरल आ पाया और अब लंबी जद्दोजेहद के बाद काम मिला है, यहां टैक्सी चला रहा हूं।’

यह कहानी सिर्फ माहिम की नहीं, केरल में ऐसे लाखों लोग हैं, जो कोरोना के चलते गल्फ के देशों से दोबारा केरल लौटने को मजबूर हए हैं। नॉन रेजिडेंट केरलाइट्स अफेयर्स (NORKA), यह केरल का सरकारी संस्थान है, जो काम के लिए केरल से बाहर गए लोगों का रिकॉर्ड रखने के साथ उनकी मदद भी करता है। एर्नाकुलम् में नोरका सेंट्रल के मैनेजर राजेश बताते हैं कि 21 मार्च 2021 तक के आंकड़े के मुताबिक गल्फ देशों से 12.32 लाख लोग केरल लौटे हैं। ये वे लोग हैं, जो नोरका में रजिस्टर्ड हैं, बाकियों का आंकड़ा नहीं है। इनके अलावा गल्फ देशों में बहुत से लोगों ने नौकरी खो दी है। वे भी वापस लौटना चाहते हैं।

कोरोना के चलते खाड़ी देशों में फंसे केरल के प्रवासियों की बड़ी संख्या वंदे भारत मिशन के तहत वापस आई थी। गल्फ कंट्रीज से वापस आने के बाद यहां रोजगार पाना उनके लिए नई चुनौती है।

कोरोना के चलते खाड़ी देशों में फंसे केरल के प्रवासियों की बड़ी संख्या वंदे भारत मिशन के तहत वापस आई थी। गल्फ कंट्रीज से वापस आने के बाद यहां रोजगार पाना उनके लिए नई चुनौती है।

राजेश बताते हैं कि वापस लौटे लोगों के सामने सबसे बड़ी समस्या जॉब की है। जो लोग लौटे हैं, उनके लिए यहां नए सिरे काम शुरू करने की चुनौती भी है। नोरका ऐसे लोगों को काम-धंधे के लिए लोन भी दे रहा है। नोरका से अधिकतम 20 लाख रुपए तक का लोन मिल रहा है। तीन लाख रुपए तक की सब्सिडी भी है। ये लोन हम चार साल तक के लिए सिर्फ 3% के इंटरेस्ट रेट पर ही दे रहे हैं। जरूरमंदों को लोन दिलाने के लिए नोरका ने 12 बैंकों के साथ टाइअप किया है। अब तक 1500 से ज्यादा लोगों ने लोन भी लिया है।

कोच्चि के रहने वाले राजेश आनंद 20 साल से बहरीन में IT सेक्टर में काम कर रहे थे। इसके अलावा वह गल्फ के कई देशों में अलग-अलग प्रोजेक्ट पर भी काम कर चुके हैं। कोरोना के दौर में वह भी वंदे भारत की फ्लाइट से वापस केरल लौटे। तब से वह यहीं पर काम कर रहे हैं। अब उनका यहां काम में मन भी रम चुका है।

आनंद ने बेंगलुरु में डिजिटल ट्रांसफार्मेशन को लेकर एक प्रोजेक्ट भी शुरू किया है। उनकी कंपनी का नाम सिग्नेचर वर्ल्ड है। आनंद कहते हैं, ‘इंडिया लौटकर काम करने में बड़ा आनंद आ रहा है। इंडिया में बहुत स्कोप है, गल्फ में कुछ नहीं है, अभी सारी विदेश कंपनियां इंडिया की ओर देख रही हैं। इंडिया कितना बड़ा मार्केट है, मैं अब समझ गया हूं, अपने जिस प्रोजेक्ट के लिए मैं गल्फ में रहकर बाहर से फंडिंग मांगता था, उसमें काफी वक्त लग जाता था। लेकिन मैंने अभी जो प्रोजेक्ट शुरू किया है, उसके लिए जापान से मुझे तुरंत फंडिंग मिल गई है। अभी फिलहाल मेरी टीम में 14 लोग काम कर रहे हैं।’

बहरीन के IT सेक्टर में काम करने वाले राजेश आनंद भी कोरोना के चलते केरल वापस लौट आए। राजेश का मानना है कि इस समय भारत में गल्फ कंट्रीज से ज्यादा मौके हैं। हाल ही में उन्होंने बेंगलुरु में अपना एक प्रोजेक्ट भी शुरु किया है।

बहरीन के IT सेक्टर में काम करने वाले राजेश आनंद भी कोरोना के चलते केरल वापस लौट आए। राजेश का मानना है कि इस समय भारत में गल्फ कंट्रीज से ज्यादा मौके हैं। हाल ही में उन्होंने बेंगलुरु में अपना एक प्रोजेक्ट भी शुरु किया है।

आनंद बताते हैं कि कोरोना का असर गल्फ देशों पर भी बहुत भयानक पड़ा है। बहरीन जैसे देश में भारतीयों के हालात काफी खराब हो गई है। बहरीन नरक बन गया है, वहां आप सरवाइव नहीं कर सकते हैं। केरल से लोग बस अच्छी लाइफस्टाइल पाने के चक्कर में गल्फ जाते हैं। लेकिन, ज्यादातर लोगों को लेबर का काम मिलता है। कोई पलम्बर का काम करता है, तो कोई टैक्सी चलाता है, कोई तेल कारखाने में काम करता है। यहां से गए 70% लोग 40 हजार रुपए महीने से भी कम में काम करते हैं। हां, टॉप मोस्ट जॉब भी केरल के लोग ही वहां करते हैं। लेकिन 90% लोग ब्लू कॉलर जॉब करते हैं। केरल के लोग या बाकी देश के लोग इसलिए गल्फ जाते हैं कि वे तमाम सच्चाइयों से दूर रहते हैं, वापस आते हैं तो परिवार के साथ कुछ वक्त अच्छी जिंदगी जी पाते हैं।

सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी रिसर्च (CPPR) के चेयरमैन डॉक्टर धनुराज बताते हैं कि केरल के 40 लाख लोग विदेशों में रहते हैं, ये हर साल 80 हजार करोड़ रुपए केरल को भेजते हैं। पिछले साल 20 हजार करोड़ रुपए कम आए। इससे भी केरल के मार्केट में पैसा कम हुआ है। जो लोग वापस आए हैं, उनमें से 90% यहां बेरोजगार हैं। केरल में इंडस्ट्री तो है नहीं। यहां सारा पैसा विदेशों से ही आता है, यहां आपको हाईक्वॉलिटी सर्विस इसलिए मिलती है, क्योंकि लोगों के पास गल्फ का पैसा है। आपको यहां लग्जरी होटल, रिजॉर्ट, रेस्टोरेंट्स, बार इसीलिए मिलते हैं, क्योंकि लोगों के पास बाहर से आया हुआ पैसा है।

डॉक्टर धनुराज बताते हैं कि गल्फ से लोगों की वापसी का सबसे बड़ा इम्पैक्ट सोसाइटी पर पड़ा है, यहां बड़े पैमाने पर सोशल अनरेस्ट है, क्योंकि लोगों ने जॉब खो दिया है। बैंक भी मुश्किल में हैं, क्योंकि बहुत से लोगों ने गल्फ में जॉब के भरोसे गाड़ी खरीदने से लेकर घर बनाने तक के लिए लोन ले रखा है, अब उनके पास लोन चुकाने के पैसे नहीं हैं।

धनुराज बताते हैं कि केरल में 70% जॉब सर्विस सेक्टर में है। यहां 5.5 लाख लोग सरकारी नौकरी करते हैं, जबकि तकरीबन 8 लाख लोग प्राइवेट सेक्टर में जॉब करते हैं। कोरोना के बाद होटल, टूरिज्म, इंडस्ट्री सेक्टर में काम करने वाले तमाम लोगों की जॉब गई है, लेकिन सरकार ने इसका कोई आंकड़ा नहीं बताया है।

सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी रिसर्च (CPPR) के चेयरमैन डॉक्टर धनुराज बताते हैं कि केरल के 40 लाख लोग विदेशों में रहते हैं। ये हर साल 80 हजार करोड़ रुपए केरल को भेजते हैं। पिछले साल 20 हजार करोड़ रुपए कम आए। इससे भी केरल के मार्केट में पैसा कम हुआ है।

सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी रिसर्च (CPPR) के चेयरमैन डॉक्टर धनुराज बताते हैं कि केरल के 40 लाख लोग विदेशों में रहते हैं। ये हर साल 80 हजार करोड़ रुपए केरल को भेजते हैं। पिछले साल 20 हजार करोड़ रुपए कम आए। इससे भी केरल के मार्केट में पैसा कम हुआ है।

राज्य के वित्त मंत्री थॉमस आइजाक के मुताबिक कोरोना से केरल को 1.56 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। वहीं, मुख्यमंत्री विजयन का दावा है कि उनकी सरकार ने 1.2 लाख नई जॉब जेनरेट की हैं। हालांकि, इस पर धुनराज कहते हैं कि ये जॉब कहां आई हैं और किसे मिली हैं, कोई नहीं जानता है, क्योंकि राज्य में जॉब की भारी क्राइसिस है।

नॉन रेजिडेंट केरलाइट्स अफेयर्स (NORKA) के राजेश बताते हैं कि सरकार ने गल्फ से राज्य लौटे 1.22 लाख लोगों को 5 हजार रुपए दिए हैं। इसके साथ प्रवासी लोग अपना खुद का बिजनेस शुरू कर सकें, इसके लिए सरकार ने 712 वेंचर्स के लिए 14 करोड़ रुपए बतौर सब्सिडी भी दी है, लेकिन सरकार कि यह रकम प्रवासियों को रोजगार देने के लिए काफी कम है।

कन्नूर के रहने मोहम्मद शब्बीर UAE से लौट हैं। वह वहां 40 साल से काम कर रहे थे, शब्बीर वहां टैक्सी चलाने के साथ ग्रॉसरी की दुकान भी चलाते थे, लेकिन कोरोना ने उन्हें सबकुछ छोड़कर केरल लौटने का मजबूर कर दिया है। अब वह यहां अपना रोज का खर्च नहीं चला पा रहे हैं। शब्बीर ने होम लोन भी ले रख है, बैंक की किश्त भी देनी है, लेकिन बचत के सारे पैसे खत्म हो चुके हैं। वह दोबारा UAE लौटना चाहते हैं, लेकिन दोबारा जा पाना और फिर काम शुरू कर पाना उनके लिए किसी अजूबे से कम नहीं है।

केरल में माहिम, राजेश आनंद और मोहम्मद शब्बीर की कहानी लाखों लोगों की आपबीती हैं, जो इस मुश्किल वक्त में नई जिंदगी शुरू करने की जद्दोजहद में लगे हैं।

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