Wednesday, April 14, 2021
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ड्रोन इमेज की फिजिकल वेरिफिकेशन में चूक: प्रॉपर्टी सर्वे में किसी का रकबा घटाया तो कहीं दो मकानों की बना दी एक ही आईडी


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रोहतक15 मिनट पहले

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शहर में प्रॉपर्टी सर्वे बना लोगों की आफत, काट रहे निगम के चक्कर

  • शहर में प्रॉपर्टी सर्वे बना लोगों की आफत, काट रहे निगम के चक्कर
  • -निगम की टैक्स ब्रांच के अधिकारियों का तर्क- सर्वे एजेंसी ने पोर्टल पर अपलोड किया डेटा, हमारे पास आने के बाद ही उजागर होगी सच्चाई

नगर निगम की 8 अप्रैल को प्रस्तावित बैठक में इस बार नए प्रॉपर्टी सर्वे में मिल रही गड़बड़ियां बहस का बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है। कारण पूरे शहर में इस सर्वे पर आपत्तियां दर्ज हो रही हैं। दरअसल इन दिनों प्रॉपर्टी सर्वे पूरा होने के बाद अब दावे-आपत्तियों की सुनवाई और समाधान का दौर चल रहा है।

अब तक 150 शिकायतें ऑफलाइन मोड में दर्ज हुई हैं। इनमें नाम में हेरफेर, छोटे प्लाट को बड़ा, बड़े प्लाट को छोटा अथवा रेजीडेंशियल प्लाट को कामर्शियल करने जैसे मामलों को लेकर लोगों ने शिकायत दर्ज कराई हैं। वहीं संपत्ति मालिकों का कहना है कि समाधान के लिए अधिकारियों के कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं।

पूछने पर अधिकारी सर्वे में गड़बड़ी के लिए ड्रोन को ही जिम्मेदार ठहराते हैं। जबकि ड्रोन से नगर निगम की सीमा के अंदर मोहल्लों-कॉलोनियों के विस्तार का चित्र लिया गया था। इसके भौतिक सत्यापन और जरूरी दस्तावेजों के मिलान के लिए जयपुर की सर्वे एजेंसी की टीम को डोर टू डोर हर वार्ड में जाकर प्रत्येक आईडी का अपने मोबाइल ऐप से मिलान करते हुए डिटेल अपलोड करना था। खामी इसी स्तर पर हुई। टीम की ओर से गलत डेटा फीड करने से ही संपत्ति से संबंधित तथ्यों में हेरफेर के मामले निकल कर आ रहे हैं।

ऐसे किया गया प्रॉपर्टी सर्वे: जयपुर की सर्वे एजेंसी द्वारा नगर निगम एरिया का प्रॉपर्टी सर्वे किया गया है। इसके लिए पहले ड्रोन से मोहल्लों-कॉलोनियों व अन्य क्षेत्रों की तस्वीर ली गई। इसके बाद एजेंसी के कर्मचारियों की टीम ने डोर टू डोर जाकर ड्रोन से ली गई इमेज की सिलसिलेवार पड़ताल की। प्रॉपर्टी की फ्रंट व साइड से फोटो ली और आईडी मालिक से दस्तावेजों का मिलान कर पोर्टल पर तथ्य अपलोड किए।

अलग मिल्कियत के दो प्लाट की बना दी एक आईडी सुभाष नगर निवासी इंद्रजीत गिरधर ने बताया कि उनके दो प्लाट साथ में हैं। उनकी मिल्कियत अलग-अलग हैं। लेकिन नए सर्वे में दोनों प्लाट की एक आईडी बना दी गई है। प्रीतम नगर निवासी कर्मवीर के 100 गज के प्लाट को कामर्शियल दिखा दिया। जबकि वह रेजीडेंशियल है। तिलक नगर निवासी नरेश के प्लाट का रकबा घटाकर 164 गज की बजाए 150 गज कर दिया गया।

नई आईडी में अधूरे नाम की भी शिकायतें : सेक्टर एक में मकान नंबर 310 कृष्ण कुमार खीरवाट है। इसी नाम से हुडा विभाग की ओर से प्लाट का अलॉटमेंट है। लेकिन नई सर्वे में केवल कृष्ण कुमार ही दर्ज है। ऐसे ही सेक्टर एक की मार्केट में दुकान नंबर 82 रुचि के नाम है। लेकिन नई प्रॉपर्टी आईडी में इसका मालिकाना हक कदम सिंह अहलावत के नाम दर्शा दिया गया है।

सर्वे डेटा पोर्टल पर अपलोड, निगम के पास नहीं आया

सर्वे कंपनी ने प्रॉपर्टी सर्वे का डॉटा पोर्टल पर अपलोड कर रखा है। जब हमारे पास डॉटा आएगा तब सारी जानकारियों का पता चलेगा। वैसे प्रॉपर्टी मालिकों से मांगी गई दावे-आपत्तियों का समाधान शुरू करवा दिया गया है। अभी भी दावे आपत्तियां निगम कार्यालय के काउंटर पर ली जाएंगी।
-जगदीश चंद्र शर्मा, जेडटीओ नगर निगम।

अलॉटमेंट वर्ग मीटर में, नई आईडी में दर्शाया वर्ग फीट

जनता कॉलोनी निवासी दिलावर फौगाट के 160 गज के प्लाट को 311 गज, अमिल लाठर के 300 गज के प्लाट को 273 गज, कमलेश के 825 गज प्लाट को 1100 गज करते हुए नई आईडी बना दी गई है। अब ये उपभोक्ता गड़बड़ी को ठीक करने के लिए नगर निगम कार्यालय पहुंच रहे हैं।

झज्जर में प्रिंसिपल सेक्टर एक निवासी दीपा कुमारी ड्रोन सर्वे से बेखबर थी। दावे आपत्तियों मांगे जाने के बाद जब उन्होंने अपनी आईडी की जांच की तो पता चला कि उनके प्लाट का रकबा 253 वर्ग फीट दिखा दिया है। जबकि वह 69 बाई 33 मीटर है। ऐसे ही सेक्टर एक निवासी निर्मल का प्लाट का हुडा की ओर से दिए गए अलॉटमेंट लेटर में 210 वर्ग मीटर में है। लेकिन इसे 255 वर्ग फीट दर्शाया गया है।

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