Sunday, April 18, 2021
Home देश समाचार अब ट्रैक्टर खेत में, आंदोलन झोपड़ी में: पक्के मकान बनाने से प्रशासन...

अब ट्रैक्टर खेत में, आंदोलन झोपड़ी में: पक्के मकान बनाने से प्रशासन ने रोका तो किसानों ने बीच का रास्ता निकाल बनवाई झोपड़ियां


  • Hindi News
  • Local
  • Punjab
  • In The Tractor Farm, In The Agitation Hut, The Administration Stopped The Construction Of Pucca Houses, Then The Farmers Got The Middle Way Made Out Of The Huts.

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

कुंडली बॉर्डरएक घंटा पहलेलेखक: राजेश खोखर

  • कॉपी लिंक

किसान 2.50 करोड़ रुपए का खर्च इन अलग-अलग प्रकार की झोपड़ियों पर कर चुके हैं।

  • 500 से अधिक बांस की झोपड़ी बनी हैं और एक पर औसतन 20 हजार तक खर्च है।
  • 200 टीन- एल्युमिनियम की झोपड़ी बनी हैं, एक पर औसतन 30-35 हजार खर्च है।

दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसानों के आंदोलन का स्वरूप लगातार बदल रहा है। सर्दियों में जहां हाईवे पर ट्रैक्टर और ट्राॅलियों की भी भीड़ दिखती थी, वहां माहौल अब बिल्कुल अलग है। ट्रैक्टर धीरे-धीरे निकल गए हैं और तिरपाल वाली ट्राॅलियों की जगह बांस की झोपड़ियों से लेकर ट्राॅलियों में एसी वाले हाईटेक मकान बन गए हैं। दूर से देखने पर लगता है कि कोई अनोखा गांव यहां बस गया है।

यह लोगों के आराम का मामला है इसलिए इस पर किसान खूब पैसे भी खर्च कर रहे हैं। एक बांस की सामान्य झोपड़ी बनाने में ही करीब 20 हजार का खर्च रहे हैं। वहीं, टीन से लेकर एल्युमिनियम की झोपड़ी और ट्राॅली के अंदर एसी से लेकर हाईटैक मकान तैयार हो गए हैं। इसका फायदा उन कारीगरों को भी हुआ है जिनको इससे काम मिला है। बॉर्डर पर रोज नई झोपड़ियों का निर्माण हो रहा है, जहां तक नजर जाती है वहीं तक झोपड़ी ही नजर आती हैं। किसानों ने झोपड़ियों की छतों पर फोम की सीट लगा रखी हैं, ताकि छत गर्म न हों। कुछ किसानों ने अंदर से झोपड़ियों की मिट्टी से लिपाई कर रखी है, जिससे दीवारें ठंडी रहें।

एक झोपड़ी के अंदर बैठे किसान रामकुमार ने बताया कि ट्रैक्टरों और ट्राॅलियों की अब खेत में जरूरत है, इसलिए उन्हें भेज दिया है। अभी पता नहीं आंदोलन कितना लंबा चलेगा। इसलिए पक्के मकान बनाने लगे थे, प्रशासन ने रोका तो हमने बीच का रास्ता निकालकर झोपड़ी बनवानी शुरू कर दी।

घर बनाने वालों की कहानी: बंद होते काम को दिखी आशा की नई किरण, मिला रोजगार

कुंडली बॉर्डर| आंदोलन में सड़क पर ही बांस से झोपड़ी तैयार करते दिल्ली से आए कारीगर।

कुंडली बॉर्डर| आंदोलन में सड़क पर ही बांस से झोपड़ी तैयार करते दिल्ली से आए कारीगर।

दिल्ली-नेपाल से आए हैं झोपड़ी बनाने वाले-एक झोपड़ी बनाने में 2 से 3 हजार तक बच रहे
बॉर्डर पर बांस की झोपड़ियों का चलन अभी सबसे ज्यादा है। इस तरह की झोपड़ी बनने का काम जहां बंद होता जा रहा था, वहीं आंदोलन में इसे आशा की नई किरण दिखाई दी है। झोपड़ी बना रहे उत्तम कुमार ने बताया कि वो और उनकी टीम दिल्ली से आए हैं। बांस खुद लेकर आते हैं और तिरपाल आदि मालिक को लाना पड़ता है। एक 10 बाई 10 की झोपड़ी 20 हजार तक में बनाकर दे रहे हैं।

एक झोपड़ी बनाने में उन्हें 3 दिन का समय लगता है और एक झोपड़ी पर 2 से 3 हजार रुपए बचते हैं। उनकी टीम 50 से ज्यादा झोपड़ी बना चुकी है और इस तरह की कई टीम दिल्ली से इस काम के लिए बॉर्डर पर आई हुई हैं। उत्तम कहते हैं कि आंदोलन से उन्हें काफी काम मिला है। इस तरह की झोपड़ियों का पुराने समय में चलन था या फिर कुछ लोग शौक के लिए बनवाते थे, लेकिन आंदोलन के कारण बड़ी संख्या में बनी हैं।

मजबूत और सुंदर बना रहे इसलिए रेट भी ज्यादा
बांस से झोपड़ी बनाने के लिए कारीगरों की टीमें नेपाल से भी आई हुई हैं। ऐसे ही एक कारीगर प्रदीप घिमिरे ने बताया कि उनके यहां की कई टीमें कुंडली, टिकरी और गाजीपुर में आई हुई हैं। दिल्ली में रहने वाले उनके कुछ साथी भी सहयोग करते हैं। घिमिरे ने बताया कि हम केवल झोपड़ी बनाने का काम करते हैं, बांस और बाकी सामान खुद मालिक को लाना होता है।

हम केवल बनाने के 5 से 8 हजार तक लेते हैं। इसलिए हमारे वाली महंगी पड़ती है और सामान समेत उसकी लागत 25 से 30 हजार तक आ जाती है, लेकिन हम मजबूत बनाने के साथ उसे मॉडर्न लुक भी देते हैं। हालांकि हमारे पास काम दूसरी टीमों के मुकाबले कम है, क्योंकि यहां किसानों को सस्ती और अस्थाई झोपड़ी चाहिए हैं। फिर भी आंदोलन ने हमारे काम को नया जीवन देने का काम तो किया है।

स्टाइल व गर्मी दोनों का ध्यान: ट्राॅलियों में एसी, झोपड़ियों में गर्मी से बचने को छत पर फोम और दीवारों की मिट्टी से लिपाई

बॉर्डर पर कुछ किसान बांस की झोपड़ियों पर बाहर से सजावट करके और आगे गैलरी बनाकर उसे पंजाबी फील दे रहे हैं।

बॉर्डर पर कुछ किसान बांस की झोपड़ियों पर बाहर से सजावट करके और आगे गैलरी बनाकर उसे पंजाबी फील दे रहे हैं।

काफी किसान बॉर्डर पर ही ट्राॅली में प्लाई से मनपसंद स्टाइल के मकान बनवा रहे हैं। इस पर 50 हजार से एक लाख तक का खर्च आ रहा है।

काफी किसान बॉर्डर पर ही ट्राॅली में प्लाई से मनपसंद स्टाइल के मकान बनवा रहे हैं। इस पर 50 हजार से एक लाख तक का खर्च आ रहा है।

किसानों ने ट्राॅलियों में बने मकानों में टीवी, डिश, स्ट्रीट लाइट और एसी व सुंदरता के लिए गमले लगा रखे हैं। कुछ के बाहर तो सीसीटीवी भी लगे हैंै।

किसानों ने ट्राॅलियों में बने मकानों में टीवी, डिश, स्ट्रीट लाइट और एसी व सुंदरता के लिए गमले लगा रखे हैं। कुछ के बाहर तो सीसीटीवी भी लगे हैंै।

ट्राॅलियों में बनी झोपड़ियों में गर्मी न लगे और मॉडर्न लुक भी दिखे इसलिए किसान इन पर रेडीमेड घास लगवा रहे हैं। ये अंदर से भी घर जैसी हैंै।

ट्राॅलियों में बनी झोपड़ियों में गर्मी न लगे और मॉडर्न लुक भी दिखे इसलिए किसान इन पर रेडीमेड घास लगवा रहे हैं। ये अंदर से भी घर जैसी हैंै।

खबरें और भी हैं…



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments